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Sunday, 31 December 2017

सहेली के भाई ने मुझे पलंग के साथ बांध कर चोदा


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सहेली के भाई के साथ सेक्स saheli ke bhai ke sath sex kiya, xxx desi kahani सर्दियों का टाइम था. मैं आगे बढ़ने के पहले, आप को बता दू; कि मैं एक कमिटेड हु और मेरा एक बॉयफ्रेंड है और उसका नाम आदित्य है और मैं उसे बहुत बहुत, बहुत करती हु. उसके लिए मैं अपनी जान तक दे सकती हु. पर पता नहीं क्यों, मैं हर बार सेक्स लाइफ के लिए फिसल जाती हु. मेरा इरादा कभी मेरे बॉयफ्रेंड को हर्ट करने का नहीं होता है. पर वासना इतनी हावी हो जाती है मुझपर, कि मैं खुद को काबू में नहीं रख पाती. और गरम देसी सेक्स के अलावा मुझे कुछ भी नज़र नहीं आता. चाहे किसी भी अच्छे से हॉट लड़के के साथ हो. वो पल होते है, जिसमे मैं दुनिया भूल जाती हु और बस मस्ती में वासना के मज़े लेती रहती हु.
ख़ैर, उसके बाद मुझमे हिम्मत नहीं होती, कि मेरी जान से आके मैं सब कुछ सच सच बता हु, पर बताये बिना भी नहीं रहा जाता.ये बात २०१२ की सर्दियों की एक शाम की है. मैं मेरी पक्की सहेली सिमोन के घर गयी थी, नाईट स्टे के लिए. हम हमेशा से ही साथ थे – स्कूल, कोचिंग, कॉलेज, ऑफिस… तो हमारी दोस्ती बहुत पक्की थी और हम अक्सर एक दुसरे के घर रात को रुक जाया करते थे. बातें और मस्ती करते थे हम दोनों, पूरी रात. उस दिन, दिन में मेरे माँ और डेड दोनों आउट ऑफ़ सिटी जा रहे थे ५ – ६ दिन के लिए. इसलिए मुझे सिमोन के घर छोड़कर चले गये थे. ताकि, उनके पीछे उन्हें मेरी फिकर ना हो.सिमोन का घर काफी बड़ा था और उसके घर में बस एक बुड्डी अम्मा रहती थी. ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। सिमोन और उसका बड़ा भाई रहा करता था. उसका बड़ा भाई समीर, बहुत ही हॉट और मस्त लड़का था. लम्बा चौड़ा, गबरू जवान पंजाबी लड़का. बिलकुल बिंदास और बेपरवाह… दुनिया से उसे कोई मतलब ही नहीं था और खुदकी मस्ती में जीता था वो. उसकी ये आदत, मुझे बहुत ज्यादा पसंद थी.ख़ैर, उस रात जब मैं सिमोन के घर रुकी थी. तब अम्मा, सिमोन की बुआ जी के घर गयी हुई थी. बस उसका बड़ा भाई समीर ही घर पर था. मैं सिमोन से मिली. थोड़ी ही देर में, हम उसके कमरे में बैठे रहे और गप्पे लगाते रहे. फिर, अचानक सिमोन को पड़ोस में रहने वाली भाभी ने किसी काम के लिए बुला लिया और वो वहां चली गयी. पीछे से वो समीर भैया को मेरा ध्यान रखने के लिए कहकर चली गयी. सिमोन के जाते ही, भैया कमरे में आये और बोले – सिमोन तुम्हारा ध्यान रखने के लिए कहकर गयी है. उनके चेहरे पर हलकी सी शरारती मुस्कान थी, जैसे कि मानो दिमाग में देसी सेक्स की तस्वीर चल रही हो.

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मैं समझ रही थी, कि उसके दिल, दिमाग और लंड में क्या चल रहा है? देसी सेक्स… मैंने भी स्माइल करके कहा – आह्ह्ह्ह!.. मुझे पहले से ही पता था, कि वो मुझे बहुत पसंद करता था और मैं भी उसे पसंद करती थी.  वो दिखने में बहुत ही हॉट था और मुझे पूरी उम्मीद थी, कि उसका लंड भी उनके जितना ही गरम और मदमस्त होगा. देसी सेक्स में, वो कमाल का होगा. वो मेरे पास आके बैठा और मुझे प्यार से सहलाने लगा. मेरे कंधे और हाथ पर अपनी उंगलिया फिराने लगा. उनकी वासना भरी नज़र सब साफ़ – साफ़ कहा रही थी. मुझे भी मज़ा आ रहा था और मैं मना नहीं कर रही थी. थोड़ी ही देर में सिमोन आ गयी और हमारा फ्लो टूट गया. पर वो मुझे धीरे से कान में कहकर गये – जो अधुरा छोड़कर (देसी सेक्स) जा रहे है, उसे पूरा जरुर करेंगेम बहुत ही जल्दी. मेरे मन में हिचकोले उठने लगे थे मस्ती के और अपनी फुद्दी उससे चुदवाने के.फिर वो दो दिन तक मौका ही ढूंढते रहे, कुछ शैतानिया और मस्तिया करते रहे, पर सिमोन के घर पर होने की वजह से हम देसी सेक्स नहीं कर पाए. बस आँखों ही आँखों में अपनी ठरक और देसी सेक्स की चाह एक दुसरे को जताते रहे. आहे भरते रहते थे और अपने होठो को काटते रहते थे. एक दुसरो को चूमने की चाह में. फिर तीसरे दिन, हमें सुनहरा मौका मिला. सिमोन के कॉलेज में प्रैक्टिकल एग्जाम थे और वो पूरा दिन कॉलेज में प्रेजेंटेशन एंड एग्जाम देने में बिताने वाली थी. समीर ने कहा, खुदसे आगे बड़कर.. ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। कि वो मेरी ध्यान रख लेंगे, अच्छे से. और सिमोन को फिकर करने के कोई जरूरत नहीं है.फिर जैसे ही सिमोन गयी – वैसे ही समीर भैया मुझे अपने कमरे में ले गये और बोले – आओ रचना, तुम्हारा बहुत अच्छे से ध्यान रखूँगा. ये कहकर वो मेरे गुलाबी होठो को चूमने लगे. मेरे स्तनों को अपनी चेस्ट से रगड़ने लगे. उनकी चेस्ट पर मेरी सख्त चुचिया रगड़ खा रही थी और मैं मस्त होके मेरी चूत को अपनी ऊँगली से रगड़ने लगी थी. मैंने जैसे ही अपनी  ऊँगली अपनी चूत पर रखी, तो पाया कि मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और मैं देसी सेक्स के लिए तैयार थी. मैं पीछे होकर बिस्तर पर लेट गयी थी और वो मेरे ऊपर आके लेट गये. अपनी चेस्ट से मेरे रस भरे स्तनों को दबाने लगे. उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत पर रखा और उसपर रगड़ने लगे. एकदम सख्त होने के बाद, उन्होंने मेरी चूत में अपना लंड देने की कोशिश की. पर वो बहुत ही बड़ा था और दर्द करने लगा था. मेरी चीख निकलने लगी. उन्होंने अपने हाथ से मेरा मुह दबाया और अपना लंड बाहर निकाल कर दुबारा अन्दर डाला, मेरी फुद्दी में. इस बार, इतनी गहराई तक गया, उनका मोटा और लम्बा लंड; कि मुझे मज़ा ही आ गया. मुझे दर्द हो रहा था, लेकिन मैं मस्ती के मारे चीख रही थी.

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वो अपना लंड अन्दर बाहर करते रहे और मुझसे मिशनरी पोजीशन में देसी सेक्स करते रहे और चोदते रहे. फिर उन्होंने पोजीशन बदल कर मुझे डौगी स्टाइल में पीछे से चोदा और मेरे बड़े  बड़े हिलते हुए स्तनों को पीछे से दबाते रहे. वो अपना लंड जोर से अन्दर – बाहर कर रहे थे. उनके सुपाडे मुझे मेरी गांड पर लगते हुए महसूस हो रहे थे, जब तक उन्होंने मुझे देसी सेक्स में चोदा. ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मैं मज़ा लेती रही और वो अपने लंड को मेरी फुद्दी में तेजी से अन्दर बाहर कर रहे थे. मुझे मज़ा आ रहा था और मेरी चूत तो पानी – पानी हो रखी थी. क्योंकि, ऐसे खतरनाक देसी सेक्स से पता नहीं, मैं कितनी बार झड चुकी थी उस दिन.पूरा दिन, हम दोनों थोड़ी – थोड़ी देर के अन्तराल में, देसी सेक्स करते रहे और वो मेरी फुद्दी को अपना लंड चखाते रहे, जब तक सिमोन घर वापस नहीं आ गयी. उसके बाद अगले ३ दिन तक पूरा दिन सिलसिला चलता रहा और बेचारी सिमोन को अंदाज़ा भी नहीं था, कि उसकी पीठ के पीछे ये सब हो रहा है!कैसी लगी

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Thursday, 9 November 2017

बहन की चुदाई साथ में उसकी बेस्ट फ़्रेंड की चुदाई

यह कहानी मेरी बहन की चुदाई के साथ साथ उसकी सहेली की चुदाई की भी है.
मैं अभिजीत गोवा से हूँ। आप सभी जानते ही हैं कि रात में गोवा में क्या चलता है।
अब मैं आपको मेरी बहन दीपा के बारे में बताता हूँ, उसकी उम्र तब करीब 21 साल थी और मेरी 19 थी। मेरी दीदी दिखने में एकदम अप्सरा जैसी लगती हैं। उसके 36 साइज़ के चूचे और 30 की कमर.. उसके नीचे सितार के ढोल जैसी 38 इंच की गोल गांड.. एकदम मक्खन जैसी सॉफ्ट.. और उसकी सहेली लानी.. हय.. उसकी तो बात ही मत करो। उसकी हाइट करीब 5 फुट 10 इंच की होगी। बिल्कुल मेरी बहन की लम्बाई के समान.. दोनों ही बिल्कुल दूध सी गोरी हैं।
तब हम सभी कॉलेज में पढ़ रहे थे, वो दोनों ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में थीं और मैं फर्स्ट ईयर में था।
लानी मेरी बहन की बेस्ट फ़्रेंड है.. इसलिए पढ़ाई के कारण ज्यादातर रात में वो हमारे ही घर पर ही रुक जाती है।
एक दिन वो दोनों ने कॉलेज से आकर थक कर हमारे घर में बैठी हुई थीं, मैंने उन दोनों को कोला लाकर दी, इस पर उन दोनों खुश होकर मेरे गाल पर एक एक चुम्मा कर दिया।
मैं तो जैसे लानी के होंठों का दीवाना हो गया।
धीरे-धीरे लानी और मुझमें दूरी खत्म होती गई, एक रात मैंने उसे प्रपोज़ कर दिया, उसने भी मुझे स्वीकार कर लिया।
फिर एक दिन मैं उसे अपने कमरे में ले जाकर किस कर रहा था। वो दीवाली की रात थी… पता नहीं कब दीपा उस कमरे में आ गई। उसने हम दोनों को किस करते देखा तो वो खांसी.. उसे देख कर हम दोनों डर गए।
लानी बोली- देख तू अपने बॉयफ्रेंड को किस करती है, तो मुझे अपने को करने दे।
उन दोनों में बात शुरू हो गई तो मैं वहाँ से चला गया। उसी रात करीब एक बज़े मैंने उनके कमरे का दरवाज़ा ठकठकाया तो दीदी ने आकर दरवाजा खोला। मैंने उसके पैर पकड़ लिए।
वो हंसी और मुझे कमरे में ले गई।
उसने मुझसे कहा- तू अपनी गर्लफ्रेंड को किस करने आया है ना.. तो कर ले.. मैं उसमें क्यों टांग घुसाऊँगी।
उसने लानी को उठाया और बोली- चल अपना आधा कम पूरा कर..!
मैं झट से लानी ऊपर कूद पड़ा और किसिंग शुरू कर दी। फिर 5 मिनट तक बस किसिंग सीन ही चलता रहा। मैंने नोटिस किया कि लानी अपनी चुची पर हाथ फेर रही थी और उसकी सांसें तेज हो गई थीं।
फिर मैंने धीरे से उसकी कमर पर हाथ रखा और सहलाने लगा। वो तो जैसे नशे में आ गई थी और मुझसे चिपक गई। उसकी कमर तो जैसे मक्खन का गोला था.. मेरा हाथ फिसला जा रहा था।
यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!
हमें ये सब करते देख कर दीदी चिल्लाने लगी- ये सब क्या चल रहा है।
फिर लानी ने दीदी को पकड़ा और बोली- मुझे तुझसे कुछ कहना है।
‘क्या?’
लानी बोली- तू तो अपने बॉयफ्रेंड को अपनी चुची पर हाथ मारने देती है.. पर अभि ने बस ये किया तो तू चिल्लाने लगी।
मैंने फिर भी दीदी के पैर पकड़ लिए- दीदी प्लीज़ हमको ये करने दो ना प्लीज़.. तुम जो कहोगी.. मैं वो करूँगा।
फिर दीदी ने कहा- ओके बस थोड़ी देर के लिए.. ज्यादा नहीं।
दीदी दूसरी तरफ मुँह करके लेट गईं। मैं लानी की गर्दन पर किस करने लगा और साथ ही उसकी चुची को मसलने लगा। वो कामुक सिसकारियाँ लेने लगी ‘आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… उम.. धीरे करो ना अहह..’
फिर मैंने नोटिस किया कि दीदी अपनी चुत रगड़ रही थीं।
मैं बोला- दीदी क्या कर रही हो..?
वो हड़बड़ा गई और बोलीं- जरा खुजली हो रही थी।
लानी बोली- दीपा तूने तो कल शेव की थी ना.. फिर खुजली कैसी.. झूट मत बोल।
दीपा बोली- तुम दोनों ऐसे सिसकारियाँ लोगे तो मैं कैसे सो पाऊँगी?
लानी बोली- तो तू मजा क्यों नहीं लेती.. दूसरे लड़कों से चुची दबवाती है.. घर में मिल रहा है तो तुझे बुरा लग रहा है।
दीदी चुप रही तो लानी ने मुझसे कहा- उधर जाओ और दीपा को भी किस करो!
मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, फिर भी मैंने दीदी को पकड़ा और धीरे से उन्हें किस करना शुरू कर दिया।
शायद लानी इस तरह की ब्लू-फिल्म देख़ चुकी थी, इसलिए उसने धीरे से दीपा की चुत पर हाथ से रगड़ना शुरू कर दिया, इससे दीपा गरम हो गई और जोर-जोर से मेरी ज़ुबान को अपने मुँह में खींचने लगी।
लानी ने मेरे कान में कहा- अपनी बड़ी बहन की चुदाई करेगा?
मैं चुप रहा पर मुस्कुरा दिया.
लानी समझ गई, फिर चालाकी से उसने दीपा की पेंटी उतार दी और मुझे इशारा करने लगी। मैंने दीपा को उठाया और लानी की मुँह पर बिठा दिया।
अब तो मुझे पता चल गया था कि बहुत मजा आने वाला है। लानी दीपा की चुत को अपनी ज़ुबान से लिक करने लगी।
दीपा की भी गर्मी बढ़ गई और वो चुदने की पोज़िशन पर आ गई, चुत चूसने से जैसे दीपा जैसे पागल सी हो उठी थी।
फिर उस हसीन मौके का मैंने फ़ायदा उठाया अपना लंड निकाल लिया। अभी दीपा दीदी कुछ समझती कि मैंने उसके मुँह में लंड डाल दिया। वो भी इसी फिराक में दिख रही थी और उसने जोर-जोर से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
मैं एकदम गरमा गया और कुछ ही पलों में उसने मेरा माल झाड़ दिया.. और नीचे लेट गई।
अब लानी की बारी थी.. लानी आई और उसने 69 में होकर मेरे मुँह पे अपनी चुत रख दी, मैं बस उसकी मक्खन चुत को चूसता रहा। लानी ने भी मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया और साथ ही उसकी दो उंगलियां दीपा की चुत में फिंगरिंग कर रही थीं।
चुत में हलचल होने से दीपा की गर्मी फिर से बढ़ गई। वो लानी का सर पकड़ कर चुत में उंगली का मजा लेने लगी। इधर लानी की चुत चुसाई क्या हुई.. उसकी गर्मी बढ़ गई। कुछ ही पलों में उसने मेरे मुँह पर ही अपनी चुत का रस निकाल दिया।
उसकी चुत के रस से मेरा मुँह भर गया। मैंने उसका सारा रस पी लिया।
कुछ पल रुकने के बाद लानी जोर-जोर से लंड को अपने मुँह में ले कर चूसने लगी। मैं भी खुद को नहीं रोक पाया और दोबारा झड़ गया, वो दोनों मेरे सारे रस को चाट कर पी गईं।
दस मिनट यूं ही रेस्ट करने के बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया तो लानी मेरे ऊपर आई और सीधा मेरे खड़े लंड के ऊपर बैठ गई। अचानक से उसके बैठने से मुझे थोड़ा दर्द हुआ और उसे भी हुआ, पर उस वक्त की उत्तेजना के माहौल में ये सब मालूम ही नहीं पड़ा।
फिर मैंने उसके चूतड़ों को पकड़ा और धीरे-धीरे मेरा सीधा खड़ा हुआ लंड को उसको चूत में जड़ तक ठोक दिया। वो सिसकारियाँ लेने लगी। दीपा भी चुदाई करने में मुझे हेल्प करने लगी और वो मुझे किस कर रही थी।

फिर ऐसे ही चलता रहा, करीब 4 बजे सुबह तक धकापेल हुई.. मैंने बहन की चुदाई भी की.
अब हम सब कई-कई बार झड़ कर थक गए थे.. सो ऐसे ही नंगे सो गए।
फिर सुबह मम्मी ने आकर दरवाजा खटखटाया तो हम लोग हड़बड़ा गए और हड़बड़ी में दीपा ने मेरा लोवर पहन लिया, मैंने लानी की पेंटी पहन ली और लानी ने दीपा की पेंटी पहन ली। उन दोनों ने जल्दबाजी में एक-दूसरे के टॉप पहन लिए.. पर तब तक मम्मी चिल्लाने लगी थीं।
दीपा ने जाकर दरवाजा खोला, तो मम्मी मुझे उनके रूम में देख कर हैरान थीं।
मम्मी- तू कल रात यहाँ सोया था क्या..?
मैं- हाँ मॉम मुझे उस रूम में डर लगा.. इसलिए..!
फिर मम्मी ने देख लिया कि मैंने दीपा की पेंटी पहनी है। मम्मी को शायद सब पता चल गया था.. कि मैं अपनी बहन की चुदाई करा चुका हूँ फ़िर भी वो कुछ नहीं बोलीं.. सिर्फ़ स्माइल करके मुझसे कहा- मुझसे अकेले में मिलना।
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Tuesday, 7 November 2017

बहन की प्यासी सहेली की चुदाई -Hindi Sex Stories

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हैल्लो दोस्तों, में और मेरी बहन सेक्स का मस्त आनंद लेते है और हम दोनों को जब भी कोई अच्छा मौका मिलता है, तो हम हमारा वो समय बिल्कुल भी खराब नहीं करते और हम दोनों कम से भी कम दिन में एक बार तो चुदाई जरुर करते है, चाहे वो मज़े दस मिनट के लिए ही क्यों ना हो, में अपनी बहन को उसके महीने की माहवारी के दिनों में भी चोदता, जिसकी वजह से उसकी चूत के खून से मेरा पूरा लंड लाल हो जाता था और हम दोनों दिनों दिन अब गंदे सेक्स करने लगे थे, कभी कभी वो मेरा लंड चूसते हुए मेरा मूत भी पी जाती और कभी में उसका पेशाब पी लिया करता हूँ, यह सब करने में हम दोनों को बहुत मस्त मज़ा आता। फिर जब भी हम अपने घर में अकेले होते, तो बस हमारा एक यही काम होता, जिसको हम करने लगते और एक बार चुदाई करते समय मेरी बहन ने मुझसे पूछा क्या तुझे कोई लड़की पसंद है? तो मैंने उसकी चूत में बड़ी तेज धक्का देते हुए कहा, हाँ मुझे बहुत सारी लड़कियाँ पसंद है, लेकिन एक लड़की मुझे बहुत ज्यादा अच्छी लगती है और वो सभी लड़कियों से बिल्कुल अलग हटकर है, वो मेरे मन की रानी है।
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अब उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर मुझसे उस लड़की का नाम पता पूछा और पूछने लगी कि वो लड़की कौन है? तब मैंने उससे कहा कि अगर मैंने उसका नाम तुम्हारे सामने बोल दिया, तो तुम जानकर मुझसे गुस्सा हो जाओगी, इसलिए में बताना उचित नहीं समझता, तुम रहने दो, तुम जानकर वैसे भी क्या करोगी? अब मेरी बहन ने मुझसे गुस्सा ना करने का वादा करके मुझसे उसका नाम दोबारा पूछा और कहा कि तुम मुझे उस लड़की का नाम बताओ, में तुमसे कुछ भी नहीं कहूंगी, वो लड़की कौन है, बात जानकर मुझे बहुत ख़ुशी होगी प्लीज बताओ ना? तो मैंने उसके इतना पूछने पर “कृष्णा” नाम बता दिया। अब मेरी बहन ने वो नाम सुनकर एकदम चकित होकर मुझसे पूछा, क्या वो मेरी दोस्त कृष्णा तुम्हें पसंद है? फिर मैंने कहा कि हाँ वो मुझे बहुत पसंद है और अब वो यह सभी बातें सुनकर एकदम चकित होकर बड़ी शांत हो गयी। अब उसको कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। फिर मैंने उससे कहा कि मेरा मन है कि में एक बार उसको भी चोदकर उसकी जवानी के मज़े ले लूँ और अब मैंने अपनी बहन से पूछा क्या तुम उसके साथ चुदाई करने में मेरी मदद कर सकती हो? तो वो हंसने लगी और कहा कि हाँ में कोशिश जरुर कर सकती हूँ। उसके बाद तुम्हारी किस्मत है। अब मैंने उसको तेज धक्का देकर कहा हाँ ठीक है, लेकिन तुम थोड़ा जल्दी करना, क्योंकि मुझे अब उसकी भी ऐसी चुदाई करनी है। फिर वो बोली कि हाँ ठीक है मुझे पहले उसको प्यार से समझाते हुए बात बड़ेगी में देखती हूँ कि वो क्या जवाब देती है? मैंने कहा कि हाँ ठीक है, अभी बात करले आज घर में वैसे भी कोई नहीं है। फिर उसने बोला तू एक बार मुझे अच्छी तरह जमकर चुदाई के मज़े दे पहले। उसके बाद फिर में उससे बात करती हूँ।

फिर मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर खुश होकर पूरी तरह जोश में आकर करीब आधे घंटे तक लगातार धक्के देकर चोदा और अपने वीर्य को उसकी चूत की गहराइयों में ही निकालकर कुछ देर थककर उसके साथ लिपटकर लेटे रहने के बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए और उसके बाद हम दोनों उस कमरे से बाहर निकलकर हॉल में चले गए। फिर मेरी बहन ने अपनी सहेली से फोन पर बात करना शुरू किया और तब मैंने फोन का लाउडस्पिकर चालू कर दिया और बातों ही बातों में मेरी बहन उससे खुलकर बातें करने लगी, वो बोली कि आजकल मेरा चुदाई करने का बहुत मन करता है और इसलिए मेरी चूत में किसी के लंड को लेने के नाम की बहुत खुजली होने लगी है। फिर कृष्णा ने कहा कि हाँ ऐसी ही खुजली तो उसको भी अब बहुत ज्यादा होने लगी है और वो भी किसी मस्त दमदार लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाकर इसको शांत करना चाहती हूँ, में अपनी इस चूत से बड़ी परेशान हो चुकी हूँ ना जाने वो दिन कब आएगा? दोस्तों में उन दोनों की वो सभी बातें सुनते हुए खुश होकर हंसने लगा और मुझे खुश देखकर मेरी बहन भी हंसने लगी। फिर मेरी बहन ने उससे कहा कि अब हम कर भी क्या सकते है, हम कहीं बाहर जाकर अगर अपनी चुदाई भी तो किसी से नहीं करवा सकते, अगर किसी को पता चल गया था तो हमारी और हमारे घर वालों की इज़्ज़त इस काम की वजह से खराब हो जाएगी।
फिर यह बात सुनकर उसने भी झट से हाँ कह दिया, लेकिन अब वो और भी ज्यादा जोश भरी बातें करने लगी और उसी समय मेरी बहन ने कहा कि घर में सिर्फ़ एक भाई है, जिससे में अपनी चुदाई करवा सकती हूँ, लेकिन हमारे समाज में ऐसा नहीं चलता। अब यह बात सुनते ही में अपनी बहन के पास गया और मैंने उसको अपनी गोद में बैठाकर उसकी चूत पर में अपने हाथ को फेरने लगा। अब मेरे बहन की दोस्त ने कहा कि यार ये समाज भी बड़ी हरामी चीज़ है और यदि तू अपने भाई से अपनी चुदाई करवा भी लेती है, तो समाज को क्या और कैसे पता चलेगा यार? और फिर थोड़ा सा उदास स्वर में कहा कि तेरा तो फिर भी एक भाई है जिसके साथ तू अपनी चुदाई करवाने की बात सोच तो सकती है, लेकिन तू मेरे बारे में सोच में अपने घर में एकदम अकेली लड़की हूँ। फिर मेरी बहन ने उससे कहा हाँ फिर भी यार भाई को कैसे चुदाई के लिए तैयार करे? तो उसकी दोस्त ने कहा अगर मेरा तेरी तरह कोई भाई होता ना तो अभी तक तो में उससे अपनी चुदाई के मज़े भी ले चुकी होती, लेकिन अब क्या कर सकते है, क्योंकि मेरा तो कोई भाई है ही नहीं, तू कितनी किस्मत वाली है यार जो तेरे पास इतना अच्छा सुंदर गठीले गोरे बदन वाला बड़ा ही सेक्सी भाई है, तू मेरी इन बातों का बिल्कुल भी बुरा मत मानना, लेकिन में सच कहूँ तो तेरे भाई को देखकर ही मेरा उसके साथ चुदाई करवाने का मन होने लगता है।

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अब अपनी बहन की सहेली के मुहं से यह बात सुनते ही में एक बार फिर से हंसने लगा और अपनी गोद में बैठी बहन के बूब्स और उसकी चूत को मसलने सहलाने लगा। फिर उसी समय मेरी बहन ने उससे कहा कि अगर तेरा मन है तो तू अपनी किस्मत को आजमाकर देख ले, हो सकता है कि शायद मेरा भाई तुझे चोद दे, यह सब मेरे भाई के ऊपर है, लेकिन आगे होकर कोशिश तुझे ही करनी होगी। अब उसने खुश होकर कहा कि मज़ा आ जाएगा, अगर एक बार ऐसा हो गया तो में उसके साथ जमकर अपनी चुदाई के मज़े लेकर अपनी प्यासी चूत को शांत कर सकती हूँ। अब मेरी बहन ने उससे बोला तू अपनी किस्मत को आजमाकर देख ले ना, तुझे किसने मना किया है? तभी उसने कहा कि मुझे बड़ी शरम आती है। अब मेरी बहन ने उससे कहा एक तो तुझे अपनी चुदाई भी करवानी है और तुझे यह काम करते हुए शरम भी आती है वाह रे चल तू एक काम कर कल तू मेरे घर आ। फिर हम दोनों बैठकर अच्छी तरह इस विषय पर आगे बात करेंगे। फिर उसने कहा कि हाँ ठीक है में कल दोपहर के समय तेरे घर आ जाती हूँ और फिर उन दोनों ने फोन रख दिया और उन दोनों की वो बातें सुनकर में एकदम गरम हो गया। मैंने अपनी बहन को गोद में उठाकर बेड पर लेटा दिया और उसके बाद मैंने तुरंत ही उसकी पेंट और पेंटी दोनों को ही एक साथ उतारकर में उसकी चुदाई करने लगा और कुछ देर उसकी मस्त मज़ेदार चुदाई करने के बाद हम दोनों ने कल का विचार बनाना शुरू किया। फिर कुछ देर बाद दरवाजे पर लगी घंटी बज गयी, जिसकी वजह से हमारा उस समय प्लान नहीं बन सका और वो अधूरा ही रह गया, उसी रात को हम दोनों एक ही साथ सोए और दोबारा कल का प्लान बना रहे थे।

फिर मेरी बहन ने मुझसे कहा कि कल दोपहर को मम्मी के चले जाने के बाद मेरी वो दोस्त आ जाएगी, उस समय तू भी घर में ही रहना और वो आएगी तो में उससे इसी विषय के बारे में बात करूँगी और में उससे कहूंगी कि वो तुम्हें थोड़ा सा गरम करे और तुम भी उसको गरम करना, जिसकी वजह से वो गरम हो जाएगी और उसके थोड़ी देर के बाद में उससे कहूंगी कि मुझे एक जरूरी काम से बाहर जाना है और में उससे झूठ बोलकर कि में बस अभी दस मिनट में आती हूँ और में चली जाउंगी। उसके बाद तुम उसके साथ जो भी तुम्हें करना है कर लेना। दोस्तों मुझे अपनी बहन का यह प्लान बहुत अच्छा लगा। तभी मैंने उससे कहा कि में उस रूम में एक माईक लगा दूँगा, जिसकी वजह से तुम दोनों की सभी बातें में दूसरे कमरे में बड़े आराम से सुन लूँगा और मुझे पूरा सब कुछ पता हो जाएगा। फिर उसने कहा कि हाँ ठीक है। उसके बाद मैंने खुश होकर उसके बूब्स और चूत को चूसा और उसके बाद ना जाने कब में खुश होता हुआ सो गया। फिर दूसरे में सुबह से ही बड़ा खुश था और मुझे देखकर मेरी बहन के चेहरे पर भी ख़ुशी थी, दोपहर के समय मेरी बहन की वो सहेली आ गई, उसने घंटी बजाई और मैंने जाकर दरवाजा खोल दिया। दोस्तों ये कहानी आप GandiKhaniya डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर हमने एक दूसरे को देखकर मुस्कुराकर एक दूसरे का स्वागत किया। उसके बाद उसने मुझसे मेरी बहन के बारे में पूछा कि वो कहाँ है? तो मैंने हंसते हुए उसको जवाब देखकर कहा कि वो अपने रूम में है, तब वो भी उसी रूम में जाने लगी। उस समय में पीछे से उसकी मटकती हुई गांड को घूरने लगा, जो दिखने में बड़ी ही आकर्षक आकार में बहुत बड़ी गोलमटोल थी। दोस्तों मैंने उस रूम में उसके आने से पहले ही एक माईक लगा दिया था और में पास वाले कमरे में बैठकर हेड फोन से उन दोनों की वो बातें सुनने लगा। अब मेरी बहन ने अपनी सहेली से कहा अगर तुझे मेरे भाई के साथ चुदाई के मज़े चाहिए तो तू यह काम कर ले, मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा और मुझे इस बात की ख़ुशी होगी कि तुझे कम से कम अपने मन की संतुष्टि अपनी चुदाई की इस खुजली वाली परेशानी से कम से कम मुक्ति तो मिलेगी। अब वो कहने लगी कि में यह सभी बातें उसको कैसे कहूँ, वो मेरे मन की बात को कैसे समझेगा, में ऐसा क्या करूं? तो मेरी बहन ने उससे कहा कि तू उसको थोड़ा सा अपने अंग का प्रदर्शन करके गरम कर उसको अपनी तरफ आकर्षित कर हो सकता है कि शायद वो गरम हो जाए और वो अपने आप को तेरी चुदाई करने से रोक ना सके, वो तुझे चोद जिसकी वजह से तुझे उसको कुछ बोलना ही नहीं पड़ेगा, बस तुझे उसके साथ दिखाने का थोड़ा सा नाटक ही करना पड़ेगा। अब उसने मेरी बहन से पूछा कि में कैसे उसको गरम करूं, मुझे तो वो सब भी करना नहीं आता? तो बहन ने उससे बोला कि जैसे तू उसके सामने अपनी चूत, गांड, बूब्स पर अपने हाथ रख उसके सामने अपने इस गोरे हॉट सेक्सी बदन का थोड़ा सा अंग प्रदर्शन कर, जिसकी वजह से वो अपने होश खोकर तेरी चुदाई का यह काम जरुर खत्म करे। दोस्तों में उन दोनों की यह बातें सुनकर बहुत गरम हो गया और फिर कुछ देर बाद मेरी बहन ने उससे कहा कि उसको किसी काम से नीचे जाना है और वो बस दस मिनट में ही वापस आ जाएगी और उससे कहा कि यह इतना अच्छा मौका उसको दोबारा नहीं मिलने वाला, क्योंकि अब तुम दोनों ही पूरे घर में अकेले हो और बात उससे कहने के बाद वो झट से उठकर खड़ी हो गयी।

फिर में अपने कमरे से बाहर निकलकर हॉल में आकर बैठ गया और कुछ देर बाद भी मेरी बहन की वो दोस्त अभी भी उसी रूम में बैठी थी। अब मेरी बहन कमरे से बाहर आई और उसने जाते हुए मुझे मेरे उस काम के लिए शुभकामनाएँ देने के बाद उसने मुझसे धीमे स्वर में कहा कि वो अपने दूसरे दोस्त के पास जा रही है, वो करीब दो घंटे के बाद वापस आ जाएगी और मुझसे यह बात बोलकर वो चली गयी। फिर मैंने उठकर दरवाजा अंदर से बंद किया और अब में बेड पर आकर बैठकर उसके बाहर आकर मुझे गरम करने के बारे में सोच ही रहा था कि उसी समय वो बाहर आ गई और उसने मेरे सामने मुझे दिखाते हुए अपनी गांड पर थोड़ा सा हाथ घुमाया और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और फिर वो किचन में चली गयी। फिर जब वो किचन से बाहर आई तो मैंने देखा कि उसने अपनी चूत पर अपने एक हाथ को रखा हुआ था, वो अपनी चूत को मेरे सामने सहला रही थी और में अपनी आखें फाड़ फाड़कर उसकी चूत की तरफ देख रहा था। अब उसने मुझसे पूछा कि बाथरूम कहाँ है, उसको बड़ी ज़ोर से पेशाब आ रहा है और उसका वो हाथ तब तक भी चूत के ऊपर ही रखा हुआ था। फिर मैंने उसको अपने साथ ही बाथरूम तक लेकर गया और उसको बाथरूम बता दिया और वो झट से बाथरूम के अंदर चली गयी और जाते समय वो मेरी तरफ मुस्कुरा रही थी।

फिर दो मिनट के बाद वो बाहर आ गई। तब उसने जानबूझ कर मेरे सामने चाबी को नीचे गिरा दिया और फिर वो उस चाबी को उठाने के लिए मेरे सामने झुक गई, जिसकी वजह से मुझे उसकी गोरी उभरती हुई छाती साफ साफ नजर आने लगी थी और में बड़ा ही चकित होकर उसके बूब्स को घूर घूरकर देख रहा था। फिर वो सीधी होकर किचन में जा रही थी, उसी समय मैंने बिना देर किए उसको पीछे से पकड़कर बहुत ज़ोर से अपनी बाहों में भरकर पीछे गर्दन पर चूमना शुरू किया। फिर कुछ देर बाद उसको मैंने अपनी तरफ घुमाया और उसको पीछे ले जाते हुए सामने वाली दीवार के सहारे खड़ा करके में उसके होंठो पर चूमने लगा था और उसके होंठो को चूमने चाटने के साथ साथ में उसके बूब्स को भी दबा रहा था, ऐसा करने में मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था, क्योंकि उसके बूब्स आकार में बड़े होने के साथ साथ बहुत ही मुलायम था, वो ऐसा अहसास मज़ा था, जिसको में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता। फिर कुछ देर यह सब करके उसको गरम करने के बाद में उसको अपनी गोद में उठाकर अपने रूम में लेकर मैंने उसको बेड पर लेटा दिया। फिर मैंने बिना देर किए तुरंत ही अपनी टी-शर्ट और पेंट को खोल दिया और उसके बाद में उसकी शर्ट को खोलने लगा, जैसे ही मैंने उसकी शर्ट को खोला मुझे नजर आया कि उसने एक बड़ी ही सेक्सी गुलाबी रंग की आकर्षक ब्रा पहनी हुई थी। मैंने उसकी ब्रा को भी तुंरत ही उतार दिया और उसके बाद उसकी जींस उसी के साथ पेंटी को भी खोलकर मैंने उसको पूरा नंगा कर दिया।

फिर मैंने उसके बाद अपनी अंडरवियर को भी खोल दिया, जैसे ही मैंने उसकी पेंटी को खोला तो उसके तुंरत ही नीचे बैठकर मेरे लंड को अपने हाथों में भरकर झट से पूरा का पूरा लंड अपने मुहं में ले लिया। उसके बाद वो पागलों की तरह मेरे लंड को चूसने लगी और उसके ऐसा करने की वजह से मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा था और वो ख़ुशी से झूम उठी, वो किसी अनुभवी रंडी की तरह मेरा लंड चूसने में बहुत व्यस्त नजर आ रही थी और थोड़ी देर तक लंड को बड़े मज़े से चूसने लगी। अब तक में बहुत जोश में आकर पूरी तरह से गरम हो चुका था और अब मेरा झड़ने का समय पास आ चुका था और उसके चूसते हुए ही मैंने अपने लंड का सारा वीर्य उसके मुहं में छोड़ दिया, जिसको उसने अपनी जीभ से चाट चाटकर साफ कर दिया, वो बड़ी खुश नजर आ रही थी। अब में उसके ऊपर लेटकर उसके बूब्स को चूस रहा था और साथ ही उसकी चूत को भी अपने एक हाथ से छूकर सहला रहा था। फिर कुछ देर बूब्स को चूसने के बाद में अब उसकी नाभि को चाट रहा था, जो बड़ी गहरी गरम भी बहुत थी, यह काम करने में मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था और उसका जोश भी धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली को डालकर अंदर बाहर करने लगा और वो जोश में आकर आहह ऊफ्फ्फ्फ़ की आवाज़ करने लगी। फिर थोड़ी देर बाद उसने मुझसे बोला कि तुम अब अपना लंड इसके अंदर डाल दो और अब तुम मेरी चुदाई करो। फिर मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर खुश होकर तुरंत ही अलमारी से एक कंडोम निकाला और उसको अपने लंड पर लगाकर मैंने अब लंड को उसकी गीली कामुक चुदाई के लिए तरस रही चूत में अपने एक ही जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर डालकर मैंने अब उसको चोदना शुरू किया और मेरे हर एक धक्के से उसके मुहं से सिर्फ़ दर्द की वजह से आह्ह्ह्हह ऊउईईईईई माँ मर गई प्लीज धीरे करो, ऊउफ़्फ़्फ़ क्या तुम आज मुझे मार ही डालोगे, मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है, अब बस भी करो बहुत हुआ आईईईइ माँ में मर गई, बचाओ मुझे की आवाज़ आ रही थी, लेकिन फिर भी मैंने उसके दर्द उन आवाजों की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और में अपने काम में लगा रहा, उसको मैंने करीब आधे घंटे तक लगातार तेज गति के धक्के देकर चोदा।

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फिर उसके बाद जब में झड़कर शांत हुआ, तब जाकर मैंने उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकाला, जो धीरे धीरे छोटा होता चला गया और अब में उसके पास ही लेट गया और मैंने उससे पूछा क्यों मज़ा आ गया ना तुझे मेरे साथ अपनी चुदाई करवाने में? तो उसने भी हाँ कहा बोली मुझे अपनी इस पहली चुदाई इस सेक्स अनुभव में तुम्हारे साथ बड़ा मस्त मज़ा आया और मुझसे यह सभी बातें करने के बाद वो मेरे ऊपर लेटकर मुझे चूमने मेरी छाती को सहलाने लगी और कुछ देर बाद मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपनी चूत में डालकर वो खुद ही उछलने लगी, जब वो उछल रही थी, तब में उसके बूब्स को दबा रहा था। फिर मैंने कुछ देर बाद घड़ी की तरफ देखा तो अब मेरी मम्मी के वापस आने का समय होने वाला था, इसके बारे में मैंने उससे कहा, तब वो मेरे ऊपर से हटकर खड़ी हो गयी। फिर हम दोनों बाथरूम के तरफ गये और अपने को साफ करने लगे, लेकिन मुझे अब उसकी एक बार फिर से चुदाई करने का मन कर रहा था, इसलिए मैंने तुरंत ही उसको वहीं बाथरूम में लेटा दिया। उसके बाद उसके दोनों पैरों को पूरा खोलकर अपने लंड को चूत की गहराई में पहुंचाकर मैंने उसकी चुदाई करना शुरू किया और मैंने उसको बाथरूम में करीब बीस मिनट चुदाई के मज़े दिये। उसके बाद जब में झड़ने वाला था और तभी मैंने तुरंत ही अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकालकर अपने वीर्य को लंड को हाथ में लेकर मुठ मारते हुए पूरा नीचे फर्श पर निकाल दिया। फिर उसके बाद हम दोनों ने ठंडा होकर अपने अपने बदन को साफ किया और उसके बाद कपड़े पहन लिए और हम बाहर आ गए। उस समय मैंने उससे कहा कि अब उसको अपने घर चले जाना चाहिए, क्योंकि अब मेरी मम्मी आने वाली है, वो तुम्हें अकेले में मेरे साथ देखेगी तो उनको हम दोनों पर शक हो जाएगा।

फिर वो कहने लगी कि हाँ ठीक है और अब हम दोनों दरवाजे के पास खड़े हो गये और एक दूसरे को बाहों में भरकर हमने चूमना शुरू किया। उसके बाद मैंने उससे उसका मोबाईल नंबर माँगा। फिर उसने मुझे अपने फोन का नंबर तुरंत दे दिया और उसने भी मेरा फोन नंबर ले लिया और उसके बाद वो मुझसे बाय कहती हुई हंसकर अपने घर चली गयी। दोस्तों यह थी मेरी कहानी, लेकिन यह अभी अधूरी है, में बहुत जल्दी आप सभी को इसके आगे क्या क्या हुआ और हम तीनों ने मिलकर कैसे चुदाई की, वो मज़े लिए जरुर अपनी अगली कहानी इस कहानी के दूसरे हिस्से में बताऊंगा ।।

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रंडी बहन की रंडी सहेली को चोदा -Hindi Sex Stories

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हेल्लो दोस्तों, में एक बार फिर से आप सभी ahindisextories डॉट कॉम के चाहने वालों के लिए अपनी पिछली कहानी जिसका नाम था “बहन की प्यासी सहेली की चुदाई” के आगे के भाग को आप सभी के लिए लेकर आया हूँ। दोस्तों जैसा कि मैंने अपनी पिछली कहानी में सभी को बताया था कि कैसे मैंने अपनी चुदक्कड़ बहन की चुदाई करते हुए उसकी एक सहेली की चुदाई करने की अपनी इच्छा को उसको खुलकर बताया और हम दोनों के बनाए हुए जाल में उसके फंस जाने के बाद मैंने उसको जमकर चोदा और फिर उसके आगे क्या हुआ आप ही पढ़कर मज़े ले लीजिए।
दोस्तों मैंने उस लड़की की चुदाई का काम खत्म करके तुरंत ही अपनी बड़ी बहन को फोन किया और उससे कहा कि तुम्हारी वो चुदक्कड़ सहेली मेरे साथ अपनी चुदाई के मज़े लेकर मुझे खुश करके अपने घर चली गयी है। मैंने उसकी जमकर चुदाई करके उसको पूरी तरह से संतुष्ट किया और उसने भी मेरा चुदाई के समय पूरा पूरा साथ दिया और में उसकी कुंवारी चूत को पाकर बहुत खुश हूँ, क्योंकि मुझे ऐसी ही बिना नखरा नाटक करने वाली और चुदाई के समय पूरा साथ देने वाली लड़कियाँ बहुत पसंद है, उनकी चुदाई करने की बात कुछ और ही होती है, मज़ा भी बढ़कर आता है और अब तुम जल्दी से घर आ जाओ, में तुम्हें बची हुई बातें बैठकर बताना चाहता हूँ। फिर उसने मुझसे कहा कि वो थोड़ी देर बाद आ जाएगी, वो किसी काम में उलझी हुई है काम खत्म होते ही चली आएगी और फिर में बेड पर लेटकर कुछ देर पहले हुई अपनी बहन की सहेली की मेरे साथ हुई चुदाई के बारें में सोचते हुए वो द्रश्य याद करने लगा था कि तभी मेरी मम्मी आ गयी।
फिर उसके कुछ देर के बाद मेरी बहन भी आ गई और अब वो मेरे पास आकर मेरी तरफ देखकर हंसने लगी और अब उसने मुझसे पूछा हाँ अब तुम मुझे पूरी तरह विस्तार से बताओ कि क्या हुआ और कैसे तुम्हारा वो काम हुआ और तुमने उसके साथ क्या क्या किया? तो मैंने उससे कहा हाँ ठीक है और अब में तुम्हें वो पूरी बात बताता हूँ और फिर मैंने उससे कहा कि उसके साथ मुझे बहुत मज़ा आया, वो बहुत गरम जोश से भरा हुआ मस्त माल है और उसकी चुदाई करके मुझे बड़ा सुख मिला। अब वो मुझसे पूछने लगी क्या उसने तुझे गरम किया कि नहीं? तो मैंने कहा कि हाँ उसने ऐसा ही किया था, उसने सबसे पहले मुझे अपने बूब्स गांड को दिखाकर आकर्षित किया और में उसको घूरकर देखने लगा और उसके बाद मैंने उसको बिना मौका दिए अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसको में भी गरम करके उसकी चुदाई का काम पूरा करने लगा, जैसा वो चाहती थी मैंने ठीक वैसा ही किया और वो मेरी चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट होकर अपने घर चली गई। फिर मेरी बहन ने अब मुझसे पूछा अब इसके आगे का तुम्हारा क्या विचार है। अब तुम उसके साथ दोबारा क्या करना चाहते हो, क्या कल एक बार फिर से तुम उसको चोदना चाहते हो? दोस्तों मैंने तुरंत ही कह दिया कि अभी तो मुझे एक बार उसकी गांड भी मारनी बाकी है, मेरे मुहं से यह बात सुनकर मेरी बहन ने खुश होकर मुझसे कहा कि फिर ठीक है कल तू हम दोनों को एक साथ चोदना, कल तक के लिए तू अब अपना यह जोश बचाकर रख, कल तू हम दोनों को अपने लंड का दम दिखाना, क्योंकि कल तेरे लंड की असली परीक्षा है और उसको में हम दोनों के इस रिश्ते के बारे में कल सब कुछ साफ साफ बता दूंगी। अब यह बात सुनकर उसके मन से यह डर शरम एकदम निकल जाएगी। उसके बाद वो मन लगाकर बिना किसी संकोच के हम दोनों के सामने खुलकर हमारा इस काम में पूरा पूरा साथ देने लगेगी। फिर मैंने अपनी बहन के साथ मिलकर हमारा दूसरे दिन की चुदाई का विचार बना लिया और मैंने उसको कहा कि जब वो आएगी तब तुम तुरंत उठकर दूसरे रूम में चली जाना और फिर में सही मौका देखकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दूंगा। उसके बाद तुम थोड़ी देर के बाद रूम में आ जाना, जिसकी वजह से वो एकदम से चकित हो जाएगी और उसके बाद तुम्हें उसको जो कुछ भी बताना हो बता देना। फिर मेरी बहन ने मेरी पूरी बात को सुनकर हाँ कह दिया और उसको मेरा यह विचार पसंद आ गया। उसके बाद मैंने अपनी बहन की उसी चुदाई की प्यासी सहेली को एक मैसेज किया और उसमें लिखकर मैंने उसको दूसरे दिन 3.30 बजे हमारे घर आने के लिए कहा। फिर उसने भी मुझे एक मैसेज करके कहा कि वो ठीक समय पर जरुर आ जाएगी और फिर हमारे सोचने के हिसाब से वो अगले दिन ठीक 3.30 बजे आ गई। अब मेरी बहन दरवाजे पर घंटी के बजते ही मेरी तरफ मुस्कुराती हुई दूसरे वाले रूम में चली गयी और उसने अंदर से दरवाजे को बंद कर लिया।
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फिर मैंने जाकर दरवाजा खोलकर देखा वो दरवाजे के बाहर खड़ी हुई थी और में उसकी सुंदरता को बड़ा ही चकित होकर उसको घूरकर देखने लगा। फिर मैंने उसको बिना कोई मौका दिए वहीं दरवाजे पर ही तुरंत अपनी बाहों में भर लिया, जिसकी वजह से उसके बड़े आकार के बूब्स मेरी छाती से दबकर मुझे बड़ा मस्त अहसास देने लगे और उसी समय मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया। फिर मैंने दरवाजे को बंद किया और उसको तुरंत अपनी गोद में उठाकर में सीधा अपने कमरे में बेड पर ले गया और कुछ देर कपड़ो के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाने मसलने का मज़ा लेने के बाद जब वो पूरी तरह से गरम हो गई। तब मैंने सही मौका देखकर उसके कपड़े उतारना शुरू किया और उसके बाद झट से मैंने अपने भी कपड़े उतारकर अपने तनकर खड़े लंड को मैंने उसकी चूत के मुहं पर रखकर एक ही जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लंड मैंने उसकी चूत में डालकर अब मैंने उसकी चुदाई करना शुरू किया, वो कुछ देर दर्द से चिल्लाने के बाद अब मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी और में नीचे खड़ा होकर उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखकर उसकी चिकनी कामुक चूत में तेज गती के साथ अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा था, मेरे हर एक उस तेज धक्के से उसका पूरा बदन हिल जाता। अब उसके मुहं से सिसकियों की आवाज आने लगी थी, वो आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ माँ मर गई थोड़ा आराम से करो, में कहीं भागी जा रही हूँ, जो तुम मुझे ऐसे जानवरों की तरह धक्के देकर चोद रहे हो, प्लीज तुम अपनी स्पीड को कम करके पूरा अंदर तक डालो और फिर बाहर निकालो। दोस्तों ये कहानी आप GandiKhaniya डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
फिर में अब जैसा उसने मुझसे कहा वैसा ही करके उसको धक्के देने लगा और हल्के हल्के धक्के देकर उसकी चुदाई के मज़े लेते हुए हम दोनों मज़े और मस्ती की दूसरी दुनिया में जा पहुंचे। अब वो भी अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर मेरा साथ देने लगी थी, लेकिन तभी अचानक से मेरी बहन उस रूम में आ गयी, जिसको अपने सामने देखकर उसकी वो दोस्त एकदम से डरते हुए शरमा गयी और उसने मुझे धक्का देकर पीछे कर दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड अब उसकी चूत से बाहर निकलकर तनकर खड़ा हो गया। फिर वो अब अपने कपड़े उठाकर अपने नंगे बदन को उससे ढकने लगी और में बिना किसी शरम के वैसे ही पूरा नंगा अपनी बहन को देखने लगा और फिर कुछ देर बाद हम दोनों उसकी तरफ देखकर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे। अब हम दोनों को इस तरह से हंसते हुए देख वो थोड़ी चकित हुई। फिर मैंने अब उससे कहा कि यह हम दोनों का ही प्लान था कि हम दोनों मिलकर तुम्हारे साथ चुदाई के मज़े करे, मेरे मुहं से यह पूरी बात सुनकर वो हम दोनों को घूरकर देखने लगी और जब वो हमे घूरकर देख रही थी और उस समय में अपनी बहन के बूब्स दबा रहा था और वो मेरे लंड को अपने मुलायम हाथ से सहलाते हुए मुठ मार रही थी, इतना सब करने के बाद मैंने उससे कहा कि में अपनी बहन को भी तुम से पहले चोद चुका हूँ, जिसका हम दोनों ने बड़ा मज़ा लिया।
फिर मेरे मुहं से यह सभी बातें सुनकर उसको एकदम बड़ा ज़ोर का झटका लगा और वो बिल्कुल चकित होकर हम दोनों की तरफ देखने लगी। फिर मैंने उससे कहा कि अब ऐसे चकित होकर हमे घूरना बंद कर और अब तू भी आजा हमारे साथ, हम तीनों मिलकर आज मज़ा करते है, देख में तुझे कैसे कल से भी ज्यादा मज़े देता हूँ, तेरी चूत को में आज इतना जमकर चुदाई का असली मज़ा दूंगा, जिसको तू पूरे जीवन में नहीं भुला सकती, आ जा अब कैसा शरमाना चल तू भी शुरू हो जा अपनी सहेली की तरह देख यह कैसे मेरे लंड को अपना बना चुकी है, तू भी इसको अपना ही समझकर इसके साथ अपनी चुदाई के मज़े ले और वैसे भी तुझे हम दोनों के साथ रहकर बहुत कुछ करने और सिखने को मिलेगा, क्योंकि हम दोनों ही इस काम में बहुत अनुभवी है, वो तो तूने कल भी देख लिया होगा मेरे साथ अपनी पहली चुदाई करवाते समय में तुझे कैसे मज़े देते हुए चोद रहा था।
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अब वो मेरी यह सभी बातें और हम दोनों को वो काम करते हुए अपनी आखों से देखकर जोश में आने लगी और वो बेड से उठकर हमारे पास आ गई और फिर हम दोनों से चिपक गयी। उसके बाद वो दोनों ही मुझे चूमने लगी और एक नीचे बैठकर मेरे लंड को चूमने चूसने लगी, तो दूसरी ने मेरे होंठो को चूसना शुरू किया और कुछ देर बाद उन दोनों ने मुझे बेड पर लेटा दिया और मेरी बहन मेरे होंठो को चूसने के साथ साथ मेरी छाती को सहलाने लगी और उसकी सहेली नीचे पहुंचकर मेरा लंड अपने मुहं में पूरा भरकर भूखी कुतिया की तरह चूसने के साथ साथ अपनी जीभ से चाटने भी लगी। उसके बाद फिर मेरी बहन ने उसकी सहेली के बूब्स अपने मुहं में भरकर उनको चूसना दबाना शुरू किया और में उसकी चूत को चाटने लगा। फिर मैंने बारी बारी से उन दोनों की चूत में अपने लंड को डालकर एक एक को चुदाई के मज़े देने शुरू किए, जिसकी वजह से वो दोनों ही जोश में आकर मेरे साथ चुदाई के मज़े लेने लगी और फिर कुछ देर बाद मेरी बहन और उसकी सहेली ने लेस्बियन सेक्स भी किया, में उन दोनों का वो जोश देखकर बड़ा मज़ा ले रहा था।
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फिर थोड़ी देर तक मैंने उन दोनों को चोदा और बड़े मस्त मज़े हम तीनों ने लिए और मैंने अपनी चुदाई को खत्म करके हुए आखरी समय में झड़कर एक बार अपने वीर्य को अपनी बहन की चूत और दूसरी बार में उसकी सहेली की चूत में डालकर दोनों को शांत करके उनका जोश पूरी तरह ठंडा किया, इसलिए वो दोनों ही मेरी चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रही थी और में उन दोनों के नंगे बदन को अपने हाथों से सहलाते हुए बूब्स को मसलकर एक साथ दो गोरे सेक्सी जिस्म से एक साथ खेलकर मन ही मन बड़ा खुश था, शायद वो भी हमारे इन मजे मस्ती के बारे में सोचकर मुस्कुरा रही थी। फिर कुछ देर बाद हम तीनों ने उठकर अपने अपने कपड़े पहन लिए। उसके बाद वो हम दोनों को किस करके बड़ी खुश होकर अपने घर चली गयी और उसके जाने के बाद घर में अब हम दोनों अकेले थे और हमारी किस्मत से अभी तक मेरी मम्मी भी नहीं आई थी। फिर मैंने बिना देर किए अपनी बहन की पेंट को पेंटी के साथ आधा नीचे सरकाकर तुरंत उसको अपने सामने घोड़ी बनाकर लंड को एक ही दमदार धक्के के साथ पूरा अंदर पहुंचाकर में अब उसकी गांड मारने लगा था और उसने भी पूरी तरह जोश में आकर अपने कूल्हों को लगातार मेरे हर एक धक्के के साथ आगे पीछे करके मेरा पूरा पूरा साथ देते हुए अपनी गांड को मेरे लंड से मरवाने का मस्त मज़ा लेकर मुझे वो सुख दिया और कुछ देर करीब बीस मिनट के बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी गांड की गहराइयों में डालकर मैंने अपने लंड को बाहर निकालकर उसको छोड़ दिया।
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अब वो अपने कपड़े ठीक करने लगी और उसके बाद मेरी मम्मी भी आ गई उस रात को हम दोनों बहुत थके होने की वजह से जल्दी ही सो गए और फिर अगले दिन तक उसका मेरे पास एक मैसेज आ गया और उसने उसमे लिखकर मुझसे कहा कि कल सुबह में अपने घर पर बिल्कुल अकेली हूँ इसलिए तू मेरे घर आ जाना, हम दोबारा मस्त मज़ा करेंगे। फिर इस बात को मैंने अपनी बहन से बोला कि कल में फिल्म जाने के बहाने उसके घर चला जाऊंगा और हम बड़े मज़े करेंगे, तो मेरी बहन ने कहा कि हाँ ठीक है तुम चले जाना उसके साथ जमकर मज़े करना। फिर अगले दिन मैंने अपनी माँ को झूठ बोला कि में अपने दोस्तों के साथ फिल्म देखने जा रहा हूँ, उन्होंने कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन समय से घर वापस आ जाना और अपना ध्यान भी रखना और फिर में बहुत खुश होता हुआ उसके घर पहुंच गया। मैंने जाते ही उसके साथ मज़े मस्ती करनी शुरू किया, मैंने उसको तुरंत पूरा नंगा कर दिया, उसके बाद में उसकी चुदाई के मज़े लेने लगा। हमारी यह चुदाई करीब दस मिनट चली और उस बीच एक बार वो भी झड़ चुकी थी। उसके बाद हम दोनों वैसे ही पूरे नंगे चिपके लेटे हुए थे। तभी थोड़ी देर के बाद मेरी बहन का उसके पास फोन आ गया और उसने कहा कि वो भी अपनी सहेली के घर बस दो मिनट में आ रही है। फिर यह बात सुनकर हम दोंनो बहुत खुश हो गये और करीब पांच मिनट के बाद घंटी बजी तो हमने चुपके से देखा तो पता चला कि बाहर दरवाजे पर मेरी बहन खड़ी हुई थी। उसने थोड़ा सा दरवाजा खोल दिया और वो उसमे से अंदर आ गयी। फिर उसके बाद हम तीनों ने मस्त चुदाई के पहले से भी ज्यादा मज़े किए और मैंने उस पूरे दिन में उन दोनों की एक एक बार गांड भी मारी। मेरी बहन का यह पहला अनुभव था, इसलिए उसने गांड में लंड लेते ही बहुत तेज दर्द होने की बात कही और वो मुझसे लंड को बाहर निकालने के लिए कह रही थी, लेकिन मेरी बहन ने उसको समझाकर जबरदस्ती पकड़कर उसकी गांड में मेरे लंड से धक्के लगाने को कहा और मैंने भी ठीक वैसा ही किया। मेरी बहन उसकी चूत बूब्स को सहलाकर उसको शांत कर रही थी और कुछ देर बाद जब लंड ने अपने अंदर जाने का रास्ता बनाकर उसको मज़े देने शुरू किए। तब वो भी अपनी गांड को आगे पीछे करके मेरा साथ देने लगी और फिर आखरी में मैंने अपने वीर्य से उसकी गांड को पूरा भर दिया जो लंड के अंदर बाहर करने की वजह से बाहर आकर उसके कूल्हों से होता हुआ चूत तक आ पहुंचा। फिर उसके बाद मैंने उसको छोड़ दिया और हम तीनों ने उसके बाद बाथरूम में जाकर एक साथ नहाने का मज़ा भी लिया और एक दूसरे के जिस्म को पानी डालकर साफ किया। फिर शाम को हम दोनों भाई बहन अपने घर आ गए उसके बाद से अब जब भी हमें कोई अच्छा मौका मिलता है तो हम तीनों जमकर सेक्स करते है। कभी हम तीनों यह चुदाई अपने घर पर करते और कभी उसके घर में जाकर मस्त मज़े करते है। फिर जब भी हम तीनों बाहर घूमने जाते तो वो दोनों मुझसे मस्ती करने लगती और में भी उन दोनों के साथ वही सब करता हम जब फिल्म देखने जाते तब में उन दोनों को अलग अलग बैठाकर में खुद उन दोनों के बीच में बैठ जाता और फिर में अपने दोनों हाथों से कभी उनके बूब्स को दबाता और कभी उनकी चूत में उंगली करता और फिर ऐसे ही हम तीनों के मज़े के साथ यह दिन गुजर रहे है और हम आज भी साथ में मिलकर वैसे ही मज़े भी करते रहते है, जिसकी वजह से हम तीनों बहुत खुश है ।।

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